भोगावति जसि अहिकुल बासा

चौपाई ४, दोहा १७८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

भोगावति जसि अहिकुल बासा। अमरावति जसि सक्रनिवासा॥ तिन्ह तें अधिक रम्य अति बंका। जग बिख्यात नाम तेहि लंका॥ ४ ॥

अर्थ

जैसी नागकुल के रहने की [पाताललोक में] भोगावती पुरी है और इन्द्र के रहने की [स्वर्गलोक में] अमरावती पुरी है, उनसे भी अधिक सुन्दर और बाँका वह दुर्ग था। जगत् में उसका नाम लंका प्रसिद्ध हुआ।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १७८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण, कुंभकर्ण आदि के जन्म, तपस्या से प्राप्त ऐश्वर्य और तीनों लोकों पर अत्याचार का वर्णन है।

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रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार