परुसन जबहिं लाग महिपाला
परुसन जबहिं लाग महिपाला
चौपाई ३, दोहा १७३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
परुसन जबहिं लाग महिपाला। भै अकासबानी तेहि काला॥ बिप्रबृंद उठि उठि गृह जाहू। है बड़ि हानि अन्न जनि खाहू॥ ३ ॥
अर्थ
ज्यों ही राजा परोसने लगा, उसी काल [कालकेतुकृत] आकाशवाणी हुई-हे ब्राह्मणो! उठ- उठकर अपने घर जाओ; यह अन्न मत खाओ। इस [के खाने] में बड़ी हानि है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १७३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
प्रतापभानु की कथा