भयउ मनोरथ सुफल तव सुनु गिरिराजकुमारि

दोहा ७४ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

भयउ मनोरथ सुफल तव सुनु गिरिराजकुमारि। परिहरु दुसह कलेस सब अब मिलिहहिं त्रिपुरारि॥ ७४ ॥

अर्थ

हे पर्वतराज की कुमारी ! सुन, तेरा मनोरथ सफल हुआ। तू अब सारे असह्य क्लेशों को (कठिन तप को) त्याग दे। अब तुझे त्रिपुरारि मिलेंगे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “पार्वती का जन्म और तपस्या” प्रकरण का दोहा ७४ है। इस प्रकरण में सती के पार्वती रूप में जन्म और शिव-प्राप्ति हेतु कठोर तपस्या का वर्णन है।

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पार्वती का जन्म और तपस्या