अस तपु काहुँ न कीन्ह भवानी

चौपाई १, दोहा ७५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

अस तपु काहुँ न कीन्ह भवानी। भए अनेक धीर मुनि ग्यानी॥ अब उर धरहु ब्रह्म बर बानी। सत्य सदा संतत सुचि जानी॥ १ ॥

अर्थ

हे भवानी! ऐसा तप किसी ने नहीं किया। अनेक धीर, मुनि और ज्ञानी हुए हैं। अब तू ब्रह्म की श्रेष्ठ वाणी को सदा सत्य, निरन्तर और पवित्र जानकर हृदय में धारण कर।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “पार्वती का जन्म और तपस्या” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ७५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती के पार्वती रूप में जन्म और शिव-प्राप्ति हेतु कठोर तपस्या का वर्णन है।

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पार्वती का जन्म और तपस्या