पुनि परिहरे सुखानेउ परना

चौपाई ४, दोहा ७४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

पुनि परिहरे सुखानेउ परना। उमहि नामु तब भयउ अपरना॥ देखि उमहि तप खीन सरीरा। ब्रह्मगिरा भै गगन गभीरा॥ ४ ॥

अर्थ

फिर सूखे पत्ते भी छोड़ दिये, तभी पार्वती का नाम “अपर्णा' हुआ। तप से उमा का शरीर क्षीण देखकर आकाश से गम्भीर ब्रह्मवाणी हुई--।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “पार्वती का जन्म और तपस्या” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ७४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती के पार्वती रूप में जन्म और शिव-प्राप्ति हेतु कठोर तपस्या का वर्णन है।

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पार्वती का जन्म और तपस्या