भले भवन अब बायन दीन्हा

चौपाई ३, दोहा १३७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

भले भवन अब बायन दीन्हा। पावहुगे फल आपन कीन्हा॥ बंचेहु मोहि जवनि धरि देहा। सोइ तनु धरहु श्राप मम एहा॥ ३ ॥

अर्थ

अबकी तुमने अच्छे घर बैना दिया है (मेरे-जैसे जबर्दस्त आदमी से छेड़खानी की है)। अतः अपने किये का फल अवश्य पाओगे। जिस शरीर को धारण करके तुमने मुझे ठगा है, तुम भी वही शरीर धारण करो, यह मेरा शाप है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १३७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।

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नारद का शाप और मोहभंग