भाइन्ह सहित उबटि अन्हवाए

चौपाई २, दोहा ३३६ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

भाइन्ह सहित उबटि अन्हवाए। छरस असन अति हेतु जेवाँए॥ बोले रामु सुअवसरु जानी। सील सनेह सकुचमय बानी॥ २ ॥

अर्थ

उन्होंने भाइयों सहित श्रीरामजी को उबटन लगाकर स्नान कराया और छह रस का अत्यन्त प्रेमपूर्वक भोजन कराया। सुअवसर जानकर श्रीरामचन्द्रजी शील, स्नेह और संकोच से भरी वाणी बोले--

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३३६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।

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श्रीसीता-राम विवाह