देखि राम छबि अति अनुरागीं

चौपाई १, दोहा ३३६ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

देखि राम छबि अति अनुरागीं। प्रेमबिबस पुनि पुनि पद लागीं॥ रही न लाज प्रीति उर छाई। सहज सनेहु बरनि किमि जाई॥ १ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी की छबि देखकर वे प्रेम में अत्यन्त अनुरक्त हो गयीं और प्रेम के वश होकर बार-बार चरणों में लगीं। लज्जा नहीं रही, प्रीति हृदय में छा गयी। सहज स्नेह का वर्णन किस तरह किया जा सकता है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३३६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
श्रीसीता-राम विवाह