भागि भवन पैठीं अति त्रासा

चौपाई ३, दोहा ९६ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

भागि भवन पैठीं अति त्रासा। गए महेसु जहाँ जनवासा॥ मैना हृदयँ भयउ दुखु भारी। लीन्ही बोलि गिरीसकुमारी॥ ३ ॥

अर्थ

बहुत ही डर के मारे भागकर वे घर में घुस गयीं और शिवजी जहाँ जनवासा था, वहाँ चले गये। मैना के हृदय में बड़ा दुःख हुआ। उन्होंने पार्वतीजी को अपने पास बुला लिया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिवजी की विचित्र बारात” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ९६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी की विचित्र बारात और हिमवान के घर विवाह की मंगल तैयारी का वर्णन है।

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शिवजी की विचित्र बारात