अधिक सनेहँ गोद बैठारी
अधिक सनेहँ गोद बैठारी
चौपाई ४, दोहा ९६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
अधिक सनेहँ गोद बैठारी। स्याम सरोज नयन भरे बारी॥ जेहिं बिधि तुम्हहि रूपु अस दीन्हा। तेहिं जड़ बरु बाउर कस कीन्हा॥ ४ ॥
अर्थ
और अत्यन्त स्नेह से गोद में बैठाकर अपने श्याम सरोज के समान नेत्रों में आँसू भरकर कहा-- जिस विधाता ने तुमको ऐसा सुन्दर रूप दिया, उस मूर्ख ने तुम्हारे वर को बावला कैसे बनाया ?
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी की विचित्र बारात” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ९६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी की विचित्र बारात और हिमवान के घर विवाह की मंगल तैयारी का वर्णन है।
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शिवजी की विचित्र बारात