सीय बिलोकि धीरता भागी

चौपाई ३, दोहा ३३८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सीय बिलोकि धीरता भागी। रहे कहावत परम बिरागी॥ लीन्हि रायँ उर लाइ जानकी। मिटी महामरजाद ग्यान की॥ ३ ॥

अर्थ

वे परम वैराग्यवान् कहलाते थे; पर सीताजी को देखकर उनका भी धीरज भाग गया। राजा ने जानकीजी को हृदय से लगा लिया। [प्रेम के प्रभाव से] ज्ञान की महान् मर्यादा मिट गयी (ज्ञान का बाँध टूट गया)।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३३८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।

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श्रीसीता-राम विवाह