बातुल भूत बिबस मतवारे
बातुल भूत बिबस मतवारे
चौपाई ४, दोहा ११५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बातुल भूत बिबस मतवारे। ते नहिं बोलहिं बचन बिचारे॥ जिन्ह कृत महामोह मद पाना। तिन्ह कर कहा करिअ नहिं काना॥ ४ ॥
अर्थ
जिन्हें वायु का रोग हो गया हो, जो भूत के वश हो गये हैं और जो नशे में चूर हैं, ऐसे लोग विचारकर वचन नहीं बोलते। जिन्होंने महामोहरूपी मदिरा पी रखी है, उनके कहने पर कान न देना चाहिए।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ११५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।
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शिव-पार्वती संवाद