अस निज हृदयँ बिचारि तजु संसय

सोरठा ११५ · बालकाण्ड

सोरठा पाठ

अस निज हृदयँ बिचारि तजु संसय भजु राम पद। सुनु गिरिराज कुमारि भ्रम तम रबि कर बचन मम॥ ११५ ॥

अर्थ

अपने हृदय में ऐसा विचारकर सन्देह छोड़ दो और श्रीरामचन्द्रजी के चरणों को भजो। हे पार्वती! भ्रमरूपी अन्धकार के नाश करने के लिए सूर्य की किरणों के समान मेरे वचनों को सुनो!

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का सोरठा ११५ है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।

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शिव-पार्वती संवाद