बरषा घोर निसाचर रारी
बरषा घोर निसाचर रारी
चौपाई ३, दोहा ४२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बरषा घोर निसाचर रारी। सुरकुल सालि सुमंगलकारी॥ राम राज सुख बिनय बड़ाई। बिसद सुखद सोइ सरद सुहाई॥ ३ ॥
अर्थ
राक्षसों के साथ घोर युद्ध ही वर्षा-ऋतु है, जो देवकुलरूपी धान के लिये सुन्दर कल्याण करनेवाली है। रामचन्द्रजी के राज्यकाल का जो सुख, विनय और बड़ाई है वही निर्मल सुख देनेवाली सुहावनी शरद्-ऋतु है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ४२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।
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मानस का रूप और माहात्म्य