सतानंदु तब जनक बोलाए
सतानंदु तब जनक बोलाए
चौपाई ५, दोहा २३९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सतानंदु तब जनक बोलाए। कौसिक मुनि पहिं तुरत पठाए॥ जनक बिनय तिन्ह आइ सुनाई। हरषे बोलि लिए दोउ भाई॥ ५ ॥
अर्थ
तब जनकजी ने शतानन्दजी को बुलाया और उन्हें तुरंत ही विश्वामित्र मुनि के पास भेजा। उन्होंने आकर जनकजी की विनती सुनायी। विश्वामित्रजी ने हर्षित होकर दोनों भाइयों को बुलाया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा २३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का पार्वती पूजन, वरदान-प्राप्ति और राम-लक्ष्मण के मधुर संवाद का वर्णन है।
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सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद