सिय निंदक अघ ओघ नसाए
सिय निंदक अघ ओघ नसाए
चौपाई २, दोहा १६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सिय निंदक अघ ओघ नसाए। लोक बिसोक बनाइ बसाए॥ बंदउँ कौसल्या दिसि प्राची। कीरति जासु सकल जग माची॥ २ ॥
अर्थ
उन्होंने [अपनी पुरी में रहनेवाले] सीताजी की निन्दा करनेवाले (धोबी और उसके समर्थक पुर-नर-नारियों) के पापसमूह को नाश कर उनको शोकरहित बनाकर अपने लोक (धाम) में बसा दिया। मैं कौसल्यारूपी पूर्व दिशा की वन्दना करता हूँ, जिसकी कीर्ति समस्त संसार में फैल रही है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सीताराम और परिकर वन्दना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीताराम, अयोध्यापुरी, सरयू, दशरथ, कौसल्या, लक्ष्मण और भक्त मुनियों की श्रद्धापूर्ण वन्दना का वर्णन है।
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सीताराम और परिकर वन्दना