बनचर देह धरी छिति माहीं

चौपाई २, दोहा १८८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

बनचर देह धरी छिति माहीं। अतुलित बल प्रताप तिन्ह पाहीं॥ गिरि तरु नख आयुध सब बीरा। हरि मारग चितवहिं मतिधीरा॥ २ ॥

अर्थ

पृथ्वी पर उन्होंने वानर देह धारण की। उनमें अतुलित बल और प्रताप था। सभी शूरवीर थे; पर्वत, वृक्ष और नख ही उनके शस्त्र थे। वे धीर बुद्धिवाले भगवान् के आने की राह देखने लगे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “भगवान का वरदान” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १८८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भगवान द्वारा रघुकुल में अवतार लेने के वरदान और देवताओं को मिली शांति का वर्णन है।

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भगवान का वरदान