बहुरि राम पद पंकज धोए

चौपाई ३, दोहा ३२८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

बहुरि राम पद पंकज धोए। जे हर हृदय कमल महुँ गोए॥ तीनिउ भाइ राम सम जानी। धोए चरन जनक निज पानी॥ ३ ॥

अर्थ

फिर श्रीरामचन्द्रजी के चरणकमलों को धोया, जो श्रीशिवजी के हृदय-कमल में छिपे रहते हैं। तीनों भाइयों को श्रीरामचन्द्रजी के ही समान जानकर जनकजी ने उनके भी चरण अपने हाथों से धोये।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३२८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।

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श्रीसीता-राम विवाह