आसन उचित सबहि नृप दीन्हे
आसन उचित सबहि नृप दीन्हे
चौपाई ४, दोहा ३२८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
आसन उचित सबहि नृप दीन्हे। बोलि सूपकारी सब लीन्हे॥ सादर लगे परन पनवारे। कनक कील मनि पान सँवारे॥ ४ ॥
अर्थ
राजा जनकजी ने सभी को उचित आसन दिये और सब परोसने वालों को बुला लिया। आदर के साथ पत्तलें पड़ने लगीं, जो मणियों के पत्तलों से सोने की कील लगाकर बनायी गयी थीं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३२८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।
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श्रीसीता-राम विवाह