सादर सब के पाय पखारे

चौपाई २, दोहा ३२८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सादर सब के पाय पखारे। जथाजोगु पीढ़न्ह बैठारे॥ धोए जनक अवधपति चरना। सीलु सनेहु जाइ नहिं बरना॥ २ ॥

अर्थ

आदर के साथ सब के पाँव धोये और सब को यथायोग्य पीढ़ों पर बैठाया। तब जनकजी ने अवधपति दशरथजी के चरण धोये। उनका शील और स्नेह वर्णन नहीं किया जा सकता।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३२८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।

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श्रीसीता-राम विवाह