बहुरि महाजन सकल बोलाए

चौपाई २, दोहा २८७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

बहुरि महाजन सकल बोलाए। आइ सबन्हि सादर सिर नाए॥ हाट बाट मंदिर सुरबासा। नगरु सँवारहु चारिहुँ पासा॥ २ ॥

अर्थ

फिर सब महाजनों को बुलाया और सब ने आकर राजा को आदरपूर्वक सिर नवाया। [राजा ने कहा-] बाजार, रास्ते, मंदिर, देवालय और सारे नगर को चारों ओर से सजाओ।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २८७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।

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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान