बहुरि बिलोकि बिदेह सन कहहु काह
बहुरि बिलोकि बिदेह सन कहहु काह
दोहा २६९ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
बहुरि बिलोकि बिदेह सन कहहु काह अति भीर। पूँछत जानि अजान जिमि ब्यापेउ कोपु सरीर॥ २६९ ॥
अर्थ
फिर सब को देखकर, जानते हुए भी अनजान की तरह जनकजी से पूछते हैं कि कहो, यह बड़ी भारी भीड़ कैसी है? उनके शरीर में क्रोध छा गया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जयमाल पहनाना” प्रकरण का दोहा २६९ है। इस प्रकरण में धनुषभंग के बाद सीता द्वारा श्रीराम को जयमाल अर्पण और देवताओं की पुष्पवर्षा का वर्णन है।
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जयमाल पहनाना