बहुबिधि भूप सुता समुझाईं

चौपाई १, दोहा ३३९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

बहुबिधि भूप सुता समुझाईं। नारिधरमु कुलरीति सिखाईं॥ दासीं दास दिए बहुतेरे। सुचि सेवक जे प्रिय सिय केरे॥ १ ॥

अर्थ

राजा ने पुत्रियों को बहुत प्रकार से समझाया और उन्हें स्त्रियों का धर्म और कुल की रीति सिखायी। बहुत-से दासी-दास दिये, जो सीताजी के प्रिय और विश्वासपात्र सेवक थे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
श्रीसीता-राम विवाह