बधुन्ह समेत देखि सुत चारी

चौपाई २, दोहा ३४९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

बधुन्ह समेत देखि सुत चारी। परमानंद मगन महतारी॥ पुनि पुनि सीय राम छबि देखी। मुदित सफल जग जीवन लेखी॥ २ ॥

अर्थ

बहुओं समेत चारों पुत्रों को देखकर माताएँ परमानन्द में मग्न हो गयीं। सीताजी और श्रीरामजी की छबि को बार-बार देखकर वे जगत् में अपने जीवन को सफल मानकर आनन्दित हो रही हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३४९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।

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बारात का अयोध्या लौटना