आवत जानि बरात बर सुनि गहगहे

दोहा ३०४ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

आवत जानि बरात बर सुनि गहगहे निसान। सजि गज रथ पदचर तुरग लेन चले अगवान॥ ३०४ ॥

अर्थ

बड़े जोर से बजते हुए निसानों की आवाज सुनकर श्रेष्ठ बारात के आने की खबर पाकर अगवानी करने वाले हाथी, रथ, पैदल और घोड़े सजाकर बारात लेने चले।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का दोहा ३०४ है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।

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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान