आवत देखि अधिक रव बाजी

चौपाई १, दोहा १५७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

आवत देखि अधिक रव बाजी। चलेउ बराह मरुत गति भाजी॥ तुरत कीन्ह नृप सर संधाना। महि मिलि गयउ बिलोकत बाना॥ १ ॥

अर्थ

अधिक शब्द करते हुए घोड़े को [अपनी तरफ] आता देखकर सूअर पवनवेग से भाग चला। राजाने तुरंत ही बाण को धनुष पर चढ़ाया। सूअर बाण को देखते ही धरती में दुबक गया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १५७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।

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प्रतापभानु की कथा