तकि तकि तीर महीस चलावा
तकि तकि तीर महीस चलावा
चौपाई २, दोहा १५७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
तकि तकि तीर महीस चलावा। करि छल सुअर सरीर बचावा॥ प्रगटत दुरत जाइ मृग भागा। रिस बस भूप चलेउ सँग लागा॥ २ ॥
अर्थ
राजा तक-तककर तीर चलाता है, परन्तु सूअर छल करके शरीर को बचाता जाता है। वह पशु कभी प्रकट होता और कभी छिपता हुआ भागा जाता था; और राजा भी क्रोध के वश उसके साथ (पीछे) लगा चला जाता था।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १५७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।
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प्रतापभानु की कथा