अवधनाथु चाहत चलन भीतर करहु जनाउ
अवधनाथु चाहत चलन भीतर करहु जनाउ
दोहा ३३२ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
अवधनाथु चाहत चलन भीतर करहु जनाउ। भए प्रेमबस सचिव सुनि बिप्र सभासद राउ॥ ३३२ ॥
अर्थ
[जनकजी ने कहा—] अयोध्यानाथ चलना चाहते हैं, भीतर (रनिवास में) खबर कर दो। यह सुनकर मन्त्री, ब्राह्मण, सभासद और राजा जनक भी प्रेम के वश हो गये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का दोहा ३३२ है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।
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श्रीसीता-राम विवाह