अब दसरथ कहँ आयसु देहू
अब दसरथ कहँ आयसु देहू
चौपाई ४, दोहा ३३२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
अब दसरथ कहँ आयसु देहू। जद्यपि छाड़ि न सकहु सनेहू॥ भलेहिं नाथ कहि सचिव बोलाए। कहि जय जीव सीस तिन्ह नाए॥ ४ ॥
अर्थ
यद्यपि आप स्नेह [वश उन्हें] नहीं छोड़ सकते, तो भी अब दशरथजी को आज्ञा दीजिये। 'हे नाथ! बहुत अच्छा' कहकर जनकजी ने मन्त्रियों को बुलवाया। वे आये और 'जय जीव' कहकर उन्होंने मस्तक नवाया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३३२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।
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श्रीसीता-राम विवाह