पुरबासी सुनि चलिहि बराता

चौपाई १, दोहा ३३३ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

पुरबासी सुनि चलिहि बराता। बूझत बिकल परस्पर बाता॥ सत्य गवनु सुनि सब बिलखाने। मनहुँ साँझ सरसिज सकुचाने॥ १ ॥

अर्थ

जनकपुरवासियों ने सुना कि बारात जायगी, तब वे व्याकुल होकर एक-दूसरे से बात पूछने लगे। जाना सत्य है, यह सुनकर सब ऐसे उदास हो गये मानो संध्या के समय कमल सकुचा गये हों।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३३३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।

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श्रीसीता-राम विवाह