तेहि कारन आवत हियँ हारे
तेहि कारन आवत हियँ हारे
चौपाई ३, दोहा ३८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
तेहि कारन आवत हियँ हारे। कामी काक बलाक बिचारे॥ आवत एहिं सर अति कठिनाई। राम कृपा बिनु आइ न जाई॥ ३ ॥
अर्थ
इसी कारण बेचारे कामी कौवे और बगुले यहाँ आते हुए हृदय में हार मान जाते हैं। क्योंकि इस सरोवर तक आने में कठिनाइयाँ बहुत हैं। श्रीरामजी की कृपा बिना यहाँ नहीं आया जाता।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।
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मानस का रूप और माहात्म्य