अति अनूप जहँ जनक निवासू

चौपाई ४, दोहा २१३ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

अति अनूप जहँ जनक निवासू। बिथकहिं बिबुध बिलोकि बिलासू॥ होत चकित चित कोट बिलोकी। सकल भुवन सोभा जनु रोकी॥ ४ ॥

अर्थ

जहाँ जनकजी का अत्यन्त अनुपम (सुन्दर) निवासस्थान (महल) है, वहाँ के विलास (ऐश्वर्य) को देखकर देवता भी थकित (स्तम्भित) हो जाते हैं [मनुष्यों की तो बात ही क्या!]. कोट (राजमहल के परकोटे) को देखकर चित्त चकित हो जाता है, [ऐसा मालूम होता है] मानो उसने समस्त लोकों की शोभा को रोक (घेर) रखा है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का जनकपुर में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २१३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र, श्रीराम और लक्ष्मण के जनकपुर आगमन और मिथिला की अनुपम शोभा का वर्णन है।

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विश्वामित्र का जनकपुर में प्रवेश