असुर नाग खग नर मुनि देवा
असुर नाग खग नर मुनि देवा
चौपाई ४, दोहा ३४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
असुर नाग खग नर मुनि देवा। आइ करहिं रघुनायक सेवा॥ जन्म महोत्सव रचहिं सुजाना। करहिं राम कल कीरति गाना॥ ४ ॥
अर्थ
असुर, नाग, पक्षी, मनुष्य, मुनि और देवता सब आकर श्रीरघुनाथजी की सेवा करते हैं। बुद्धिमान लोग जन्म का महोत्सव मनाते हैं और श्रीरामजी की सुन्दर कीर्ति का गान करते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।
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मानस का रूप और माहात्म्य