मज्जहिं सज्जन बृंद बहु पावन सरजू
मज्जहिं सज्जन बृंद बहु पावन सरजू
दोहा ३४ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
मज्जहिं सज्जन बृंद बहु पावन सरजू नीर। जपहिं राम धरि ध्यान उर सुंदर स्याम सरीर॥ ३४ ॥
अर्थ
सज्जनों के बहुत-से समूह उस दिन श्रीसरयूजी के पवित्र जल में स्नान करते हैं और हृदय में सुन्दर श्यामशरीर श्रीरघुनाथजी का ध्यान करके उनके नाम का जप करते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का दोहा ३४ है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।
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मानस का रूप और माहात्म्य