आसिष दीन्हि सखीं हरषानीं

चौपाई ३, दोहा २६९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

आसिष दीन्हि सखीं हरषानीं। निज समाज लै गईं सयानीं॥ बिस्वामित्रु मिले पुनि आई। पद सरोज मेले दोउ भाई॥ ३ ॥

अर्थ

सखियों ने आशीर्वाद दिया। सखियाँ हर्षित हुईं और, [वहाँ अब अधिक देर ठहरना ठीक न समझकर], वे सयानी सखियाँ उनको अपनी मण्डली में ले गयीं। फिर विश्वामित्रजी आकर मिले और उन्होंने दोनों भाइयों को उनके चरणकमलों पर झुकाया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जयमाल पहनाना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २६९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में धनुषभंग के बाद सीता द्वारा श्रीराम को जयमाल अर्पण और देवताओं की पुष्पवर्षा का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
जयमाल पहनाना