अस प्रभु हृदयँ अछत अबिकारी

चौपाई ४, दोहा २३ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

अस प्रभु हृदयँ अछत अबिकारी। सकल जीव जग दीन दुखारी॥ नाम निरूपन नाम जतन तें। सोउ प्रगटत जिमि मोल रतन तें॥ ४ ॥

अर्थ

ऐसे विकाररहित प्रभु के हृदय में रहते भी जगत् के सब जीव दीन और दुखी हैं। नाम का निरूपण करके (नाम के यथार्थ स्वरूप, महिमा, रहस्य और प्रभाव को जानकर) नाम का जतन करने से (श्रद्धापूर्वक नाम-जप रूपी साधन करने से) वही ब्रह्म ऐसे प्रकट हो जाता है जैसे रत्न के जानने से उसका मूल्य।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “रामनाम की महिमा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामनाम की सर्वोच्च महिमा और कलियुग में नाम-स्मरण के कल्याणकारी प्रभाव का वर्णन है।

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रामनाम की महिमा