अस कहि परी चरन धरि सीसा

चौपाई ४, दोहा ७१ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

अस कहि परी चरन धरि सीसा। बोले सहित सनेह गिरीसा॥ बरु पावक प्रगटै ससि माहीं। नारद बचनु अन्यथा नाहीं॥ ४ ॥

अर्थ

इस प्रकार कहकर मैना पति के चरणों पर मस्तक रखकर गिर पड़ीं। तब हिमवान ने प्रेम से कहा-चाहे चन्द्रमा में अग्नि प्रकट हो जाय, पर नारदजी के वचन झूठे नहीं हो सकते।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “पार्वती का जन्म और तपस्या” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ७१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती के पार्वती रूप में जन्म और शिव-प्राप्ति हेतु कठोर तपस्या का वर्णन है।

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पार्वती का जन्म और तपस्या