प्रिया सोचु परिहरहु सबु सुमिरहु श्रीभगवान
प्रिया सोचु परिहरहु सबु सुमिरहु श्रीभगवान
दोहा ७१ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
प्रिया सोचु परिहरहु सबु सुमिरहु श्रीभगवान। पारबतिहि निरमयउ जेहिं सोइ करिहि कल्यान॥ ७१ ॥
अर्थ
हे प्रिये! सब सोच छोड़कर श्रीभगवान् का स्मरण करो। जिन्होंने पार्वती को रचा है, वे ही कल्याण करेंगे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “पार्वती का जन्म और तपस्या” प्रकरण का दोहा ७१ है। इस प्रकरण में सती के पार्वती रूप में जन्म और शिव-प्राप्ति हेतु कठोर तपस्या का वर्णन है।
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पार्वती का जन्म और तपस्या