अस कहि गहे नरेस पद स्वामी

दोहा १६७ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

अस कहि गहे नरेस पद स्वामी होहु कृपाल। मोहि लागि दुख सहिअ प्रभु सज्जन दीनदयाल॥ १६७ ॥

अर्थ

ऐसा कहकर राजा ने मुनि के चरण पकड़ लिये। [और कहा--] हे स्वामी! कृपा कीजिये। आप संत हैं, दीनदयालु हैं। [अतः] हे प्रभो! मेरे लिये इतना कष्ट सहिये।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का दोहा १६७ है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।

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प्रतापभानु की कथा