अस बिबेक जब देइ बिधाता
अस बिबेक जब देइ बिधाता
चौपाई १, दोहा ७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
अस बिबेक जब देइ बिधाता। तब तजि दोष गुनहिं मनु राता॥ काल सुभाउ करम बरिआईं। भलेउ प्रकृति बस चुकइ भलाईं॥ १ ॥
अर्थ
विधाता जब इस प्रकारका (हंसका-सा) विवेक देते हैं, तब दोषों को छोड़कर मन गुणों में अनुरक्त होता है। काल-स्वभाव और कर्म की प्रबलता से भले लोग (साधु) भी माया के वश में होकर कभी-कभी भलाई से चूक जाते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “संत असंत वन्दना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में संत और असंत के स्वभाव तथा गुण-दोष के भेद का सूक्ष्म विवेचन का वर्णन है।
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संत असंत वन्दना