आखर मधुर मनोहर दोऊ
आखर मधुर मनोहर दोऊ
चौपाई १, दोहा २० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
आखर मधुर मनोहर दोऊ। बरन बिलोचन जन जिय जोऊ॥ सुमिरत सुलभ सुखद सब काहू। लोक लाहु परलोक निबाहू॥ १ ॥
अर्थ
दोनों अक्षर मधुर और मनोहर हैं, जो वर्णमाला-रूपी शरीर के नेत्र हैं, भक्तों के जीवन हैं तथा स्मरण करने में सबके लिए सुलभ और सुख देनेवाले हैं, और जो इस लोक में लाभ और परलोक में निर्वाह करते हैं (अर्थात् भगवान् के दिव्य धाम में दिव्य देह से सदा भगवत्सेवा में नियुक्त रखते हैं)।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “रामनाम की महिमा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामनाम की सर्वोच्च महिमा और कलियुग में नाम-स्मरण के कल्याणकारी प्रभाव का वर्णन है।
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रामनाम की महिमा