राम भगति भूषित जियँ जानी

चौपाई ४, दोहा ९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

राम भगति भूषित जियँ जानी। सुनिहहिं सुजन सराहि सुबानी॥ कबि न होउँ नहिं बचन प्रबीनू। सकल कला सब बिद्या हीनू॥ ४ ॥

अर्थ

सज्जनगण इस कथा को अपने जी में श्रीरामजी की भक्ति से भूषित जानकर सुन्दर वाणी से सराहते हुए सुनेंगे। मैं न तो कवि हूँ, न वाक्य-रचना में ही कुशल हूँ, मैं तो सब कलाओं तथा सब विद्याओं से रहित हूँ।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “तुलसीदास की दीनता और भक्तिकविता” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में तुलसीदासजी की दीनता, प्रभु-कृपा पर निर्भरता और रामभक्तिमयी कविता की पवित्र महिमा का वर्णन है।

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तुलसीदास की दीनता और भक्तिकविता