अजा अनादि सक्ति अबिनासिनि

चौपाई २, दोहा ९८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

अजा अनादि सक्ति अबिनासिनि। सदा संभु अरधंग निवासिनि॥ जग संभव पालन लय कारिनि। निज इच्छा लीला बपु धारिनि॥ २ ॥

अर्थ

ये अजन्मा, अनादि और अविनाशिनी शक्ति हैं। सदा शिवजी के अर्द्धांग में रहती हैं। ये जगत् की उत्पत्ति, पालन और संहार करनेवाली हैं; और अपनी इच्छा से ही लीला-शरीर धारण करती हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिवजी की विचित्र बारात” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ९८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी की विचित्र बारात और हिमवान के घर विवाह की मंगल तैयारी का वर्णन है।

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शिवजी की विचित्र बारात