नृप सब नखत करहिं उजिआरी

चौपाई १, दोहा २३९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

नृप सब नखत करहिं उजिआरी। टारि न सकहिं चाप तम भारी॥ कमल कोक मधुकर खग नाना। हरषे सकल निसा अवसाना॥ १ ॥

अर्थ

सब राजारूपी तारे उजाला (मन्द प्रकाश) करते हैं, पर वे धनुषरूपी महान् अन्धकार को हटा नहीं सकते। रात्रि के अन्त होने से जैसे कमल, चकवे, भौरे और नाना प्रकार के पक्षी हर्षित हो रहे हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का पार्वती पूजन, वरदान-प्राप्ति और राम-लक्ष्मण के मधुर संवाद का वर्णन है।

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सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद