कहहिं सुनहिं अस अधम नर ग्रसे
कहहिं सुनहिं अस अधम नर ग्रसे
दोहा ११४ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
कहहिं सुनहिं अस अधम नर ग्रसे जे मोह पिसाच। पाषंडी हरि पद बिमुख जानहिं झूठ न साच॥ ११४ ॥
अर्थ
जो मोहरूपी पिशाच के द्वारा ग्रस्त हैं, पाखण्डी हैं, भगवान् के चरणों से विमुख हैं और जो झूठ-सच कुछ भी नहीं जानते, ऐसे अधम मनुष्य ही इस तरह कहते-सुनते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का दोहा ११४ है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।
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शिव-पार्वती संवाद