अगर धूप बहु जनु अँधिआरी

चौपाई ३, दोहा १९५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

अगर धूप बहु जनु अँधिआरी। उड़इ अबीर मनहुँ अरुनारी॥ मंदिर मनि समूह जनु तारा। नृप गृह कलस सो इंदु उदारा॥ ३ ॥

अर्थ

अगर की धूप का बहुत-सा धुआँ मानो [सन्ध्या का] अन्धकार है और जो अबीर उड़ रहा है, वह उसकी ललाई है। महलों में जो मणियों के समूह हैं, वे मानो तारागण हैं। राजमहल का जो कलश है, वही मानो श्रेष्ठ चन्द्रमा है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १९५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।

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श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला