अवधपुरी सोहइ एहि भाँती
अवधपुरी सोहइ एहि भाँती
चौपाई २, दोहा १९५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
अवधपुरी सोहइ एहि भाँती। प्रभुहि मिलन आई जनु राती॥ देखि भानु जनु मन सकुचानी। तदपि बनी संध्या अनुमानी॥ २ ॥
अर्थ
अवधपुरी इस प्रकार सुशोभित हो रही है, मानो रात्रि प्रभु से मिलने आयी हो और सूर्य को देखकर मन में सकुचा गयी हो, परन्तु फिर भी मन में विचार कर वह मानो सन्ध्या बन गयी हो।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १९५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।
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श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला