भवन बेदधुनि अति मृदु बानी

चौपाई ४, दोहा १९५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

भवन बेदधुनि अति मृदु बानी। जनु खग मुखर समयँ जनु सानी॥ कौतुक देखि पतंग भुलाना। एक मास तेइँ जात न जाना॥ ४ ॥

अर्थ

राजभवन में जो अति कोमल वाणी से वेदध्वनि हो रही है, वही मानो खगों की मुखरता समय में सनी हुई हो। यह कौतुक देखकर पतंग भी [अपनी चाल] भूल गया। एक महीना उसने बीतता हुआ न जाना (अर्थात्‌ उसे एक महीना वहीं बीत गया)।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १९५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला