अभिमत दानि देवतरु बर से
अभिमत दानि देवतरु बर से
चौपाई ६, दोहा ३२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
अभिमत दानि देवतरु बर से। सेवत सुलभ सुखद हरि हर से॥ सुकबि सरद नभ मन उडगन से। रामभगत जन जीवन धन से॥ ६ ॥
अर्थ
मनोवांछित वस्तु देने में श्रेष्ठ कल्पवृक्ष के समान हैं और सेवा करने में हरि-हर के समान सुलभ और सुख देनेवाले हैं। सुकवि शरद् ऋतु के मनरूपी आकाश को सुशोभित करने के लिए तारागण के समान और श्रीरामजी के भक्तों का तो जीवनधन ही हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा ३२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के गुण, चरित्र और रामकथा की पवित्रता एवं मुक्तिदायक महिमा का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा