सकल सुकृत फल भूरि भोग से

चौपाई ७, दोहा ३२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सकल सुकृत फल भूरि भोग से। जग हित निरुपधि साधु लोग से॥ सेवक मन मानस मराल से। पावन गंग तरंग माल से॥ ७ ॥

अर्थ

सम्पूर्ण पुण्यों के फल महान्‌ भोगों के समान हैं। जगत्‌ का छलरहित (यथार्थ) हित करने में साधु-संतों के समान हैं। सेवकों के मनरूपी मानसरोवर के लिए हंस के समान और पवित्र करने में गंगा की तरंगमालाओं के समान हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा” प्रकरण का चौपाई ७, दोहा ३२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के गुण, चरित्र और रामकथा की पवित्रता एवं मुक्तिदायक महिमा का वर्णन है।

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श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा